भारत में बेरोजगारी ! Unemployment in India


                      भारत में बेरोजगारी ! Unemployment in India


Unemployment in India
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हमारे देश में आज युबाओ के लिए सबसे बड़ा शत्रु बेरोजगारी है , और ये शत्रु बड़ी ही बेबाकी और तीजी से बढ़ता जारहा है ! और हमारे देश के युबाओ को इसका सामना करना पड़ रहा है ,


क्या है बेरोजगारी 


बेरोजगारी का मतलब व्यक्तियों उस स्थिति से है , जिसमे काम करने के दरों पर लोग काम करने को तत्पर रहते है मगर उन्हें उचित काम मिलता नहीं है ,
  आजादी के ७० साल के बाद भारत जैसे विकासशील देश में जनसँख्या की तो अधिकता है और रोजगार के अबसर बहुत ही अल्प  सख्या में है ,
      लोगों के पास हाथ है, पर काम नहीं; प्रसिक्षण है, पर नौकरी नहीं; योजनाएँ और उत्साह है, पर अवसर नहीं है. बेरोजगारी समाज के लिए एक अभिशाप है. इससे न केवल व्यक्तियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है बल्कि बेरोजगारी पुरे समाज को भी प्रभावित करती है!


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भारत में सवा अरब लोग रहते हैं, यहाँ पर बेरोजगारी की समस्या बहुत ही विकराल रूप धारण करे हुए हैं. बेरोजगारी की समस्या राष्ट्र के मस्तक पर कलंक की टिके के समान है. बेरोजगार होने से तात्पर्य होता है की काबिलियत तथा शिक्षा से पूर्ण होने के बावजूद भो रोजगार प्राप्त करने में असमर्थ होना. यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब काम की कमी होती है और काम करने वालों की अधिकता होती है.


बेरोजगारी के कारण-: बेरोजगारी की बढती समस्या निरंतर हमारी प्रगति, शांति और स्थिरता के लिए चुनौती बन रही है. हमारे देश के बेरोजगारी के अनेक कारण हैं.


1. बेरोजगारी का सबसे बड़ा कारण है- बढती हुई जनसंख्या. भारत में जनसंख्या का विस्फोट जितना जबरदस्त है, कामों के अवसरों में विकास उतना तीव्र नहीं है. हर वर्ष बढती हुई जनसंख्या बेरोजगारों की कतार को और अधिक लम्बा कर जाती है. जनसंख्या में वृद्धि के अनुपात की वजह से रोजगारों की कमी और अवसर में बहुत कम वृद्धि हो रही है इसी वजह से बेरोजगारी बढती जा रही है.
2. यंत्रीकरण अथवा मशीनीकरण ने भी असंख्य लोगों के हाथ से रोजगार छिनकर उन्हें बेरोजगार कर दिया है, क्यूंकि एक मशीन कई श्रमिकों का काम निपटा देती है. फलस्वरूप बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो रहे हैं. गाँधी जी कहा करते थे- ‘हमारे देश को अधिक उत्पादन नहीं, अधिक हाथों द्वारा उत्पादन चाहिए.’ उन्होंने बड़ी-बड़ी मशीनों की जगह लघु उद्योगों को प्रोत्साहन दिया. उनका प्रतिक था- चरखा. परन्तु अधिकांश जन आधुनिकता की चकाचौंध में उस सच्चाई के मर्म को नहीं समझे. परिणाम यह हुआ की मशीनें बढती गईं, हाथ खाली होते गए. बेकारों की फ़ौज जमा हो गई.
जन से कंप्यूटर का देश में विकास हुआ है इससे बेकारी की समस्या लगातार बढती चली जा रही है.
3. इसका दूसरा प्रमुख कारण हमारी शिक्षा व्यवस्था है. कई सालों से हमारी शिक्षा पद्धति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है. बेरोजगारी के लिए हमारी शिक्षा प्रणाली भी दोषपूर्ण है. यहाँ व्यवसाय प्रधान शिक्षा का अभाव है. व्यवहारिक या तकनिकी शिक्षा के अभाव में शिक्षा पूरी करने के बाद विद्यार्थी बेरोजगार रहता है.


4. बेरोजगारी का एक अन्य कारण है सरकार की ओर से घरेलु उद्योग धंधों को प्रोत्साहन ना देना. सरकार की ओर से बड़े बड़े व्यापारियों और कंपनियों को अरबों रूपए तक का कर्ज आसानी से मिल जाता है लेकिन लघु उद्योग स्थापित करने के लिए आम व्यक्ति को कर्ज नहीं दिया जाता है इसी कारण लघु उद्योग धंधे विकसित नहीं हो पा रहे हैं और देश में गरीबी फैली हुई है.
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