20 बेस्ट हिंदी कहानिया | 20 बेस्ट हिंदी कथाये | Best Hindi Kahaniya New | Hindi Kahaniya for kids | Hindi Kahaniya cartoon


20 बेस्ट हिंदी कहानिया | 20 बेस्ट हिंदी कथाये | Best Hindi Kahaniya New | Hindi Kahaniya for kids | Hindi Kahaniya cartoon


नमस्कार , आइये आपका www.hindiknowledgehub.com में स्वागत है | आज की भाग दौड़ भरी दुनिया में थोड़ा सा समय निकाल कर यहां प्रकाशित मनोरंजित करने वाली हिंदी कहानिया का आनंद लीजिए 

यहाँ हिंदी कहानिया और कथाये , स्कूल लव स्टोरी , हिंदी कहानिया फॉर किड्स इत्यादि काफी फेमस है ,

आइये इनका आनंद लीजिये 



हिंदी कहानी - अरेंज मैरिज | Hindi Kahani - Arrange Marriage 

रात का खाना खाने के बाद राजेश और शीला दोनों अपने कमरे में सोने के लिए चले गए , कमरे में पहुंच कर दोनों आपस में बाते कर रहे थे 

" कार्तिक की शादी के आज से तीस दिन भी नहीं बचे है , शादी की पूरी तैयारियां भी बची है , आने वाले कुछ दिनों में शादी की रश्मे शुरू होने वाली है , आठ दस दिन बाद रिंग सेरेमनी भी होनी है , और फिर शॉपिंग डोपिंग मेरा तो ये महीना पूरा पैक होने वाला है " राज के पापा दिनेश ने अपनी पत्नी रीना से कहा 

"हाँ यार , अब हमे सीरियसली काम पर लग जाना चाहिए , मुझे तो अपनी फ्रेंड्स और फैंस की लिस्ट बनानी है , किस किस को बेटे की शादी में invite करू " अपने चेहरे पर चांदनी सी मुस्कान बिखेरते हुए शीला ने कहा 

राजेश हसते हुए बोला "यार डार्लिंग तुम्हे तो अभी पार्लर भी बुक करना पड़ेगा न , चेहरे पर ग्लो भी तो लाना जरुरी है न , बेटे की शादी है " Read Full Story


हिंदी कहानी - कुसुम एक अनसुलझी पहेली


कुसुम कॉलेज जाने के लिए तैयार हो रही थी , तभी सुनीता भाभी ने पूछा कुसुम कॉलेज जा रही हो ? हाँ भाभी जी 
सुनीता - तो आज जल्दी अजाना मुस्कराकर कुसुम को चोटी बनाने लगी |
कुसुम - क्यों भाभी जी ? मै तो वैसे भी समय से आ जाती हूँ |
सुनीता - हाँ पता है तुम समय से आजाती हो फिर भी जितनी जल्दी आ सको आ जाना |
कुसुम - ठीक है भाभी जी , लेकिन आज क्या है पहले बताओ तो सही |
सुनीता - होठो पर मुस्कराहट लाते हुए , आज का दिन तुम्हारे लिए खास है , तुम्हे लड़के बाले देखने आ रहे है |
कुसुम - कौन लड़के वाले भाभी जी |
सुनीता - ठीक सब अभी जानोगी तो कालेज के लिए लेट हो जाओगी |
कुसुम भी होठो पर मुस्कराहट लिए शांत रह गई | तब तक अंजली ने आवाज लगा दी | भाभी जी कुसुम तैयार नहीं हुयी क्या ?
सुनीता - आजाओ अंदर आजाओ कुसुम तैयार हो रही है |
अंजली कुसुम की बचपन की सहेली थी , वो अपने सारे दुःख दर्द , ख़ुशी और गम सब कुछ उसके साथ साझा कर लेती है |
यही अंजली के साथ भी ऐसा ही है | अब अंजली अंदर आजाती है |

हिंदी कहानी - षणयंत्र

गीत ने अपने ऊपर झुक रहे राज को जल्दी से खींचा और चुंबन देते हुए कहा - राज कही वो न आ जाये | राज ने भी अपने झटके लगते हुए दो चुंबन देते हुए कहा - क्यों टेंशन ले रही हो अगर आजायेगा तो उसे भी दफना देंगे | गीत ने चिंतित होते हुए राज ऐसे कब तक करते रहेंगे ,
राज - टेंशन न लो सब हो जायेगा , और दोनों प्रेम प्रसंग में डूब गए , और ये कमरे की लाइट्स और देवजा दोनों ही बंद करना भूल गए साथ ही साथ ये भी भूल गए कि साथ बाले कमरे का रोशनदान भी इसी कमरे में खुलता है वहां से भी साफ साफ देखा जा सकता है , उनके रतिक्रिया की आवाजे इतनी तेज थी कि सामने आने वाले के पैरो को आवाज भी उन्हें न सुनाई दे | उनकी कामक्रीङा को कोई दरवाजे के सुराक से देख रहा था , लेकिन उन्हें भनक तक नहीं थी दोनों निर्बस्त्र एक दूसरे को बेतहासा चूमे जारहे थे और अपनी उत्तेजना के चरम पर थे | राज गीत के ऊपर से अपने शरीर को गति दे रहा था | गीत - राज प्लीज अब रहने दो , मैं थक चुकी हूँ मुझसे अब और नहीं होगा | 
राज ने एक और तेज झटका देते हुए कहा - डार्लिंग अभी मन नहीं भरा है |
गीत - कराहते हुए बेबी किसी और दिन मन भर लेना , अब बुढया के आने का टाइम भी हो गया है न जाने कब आ टपकेगी |
राज -हम्म यार लेकिन मुझे और प्यार करना था |
गीत ने धक्का मारकर अलग करते हुए कहा चलो अब जाओ भी बाबा नहीं पकड़े जायेगे और लग जाएगी हम दोनों के |
राज ने अनमने ढंग से उठते हुए शर्ट पहनने लगा |
गीत - राज जाओ जाओ कोई आरहा है |
राज - ओह्ह तेरी अभी आना क्या किसी को , उसने जल्दबाजी में उलटा पाजामा पहना और दीवार के किनारे से जल्दी से कूद के निकला और गली में जाने लगा | 
गली में बेढंगे ढंग से जाते हुए उसे उसके छोटे भाई बंटी ने देखा तो उसका शक सच्चाई में बदलता हुआ प्रतीत हुआ | और बो खड़ा खड़ा कुछ सोचता रहा |

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हिंदी कहानी - लव म्यूजिक और कनेक्शन | Hindi Kahani - Love Music and Connection 

आज से कॉलेज में एनुअल फंक्शन की प्रेपरेशन शुरू हो गयी थी , हर साल की तरह इस साल भी स्टूडेंट्स अपना अपना टैलेंट दिखने के लिए उत्सुक थे , और उन स्टूडेंट्स में से सबसे ज्यादा उत्सुक अनन्या थी , जो की ग्रेडुएशन सेकंड ईयर की स्टूडेंट थी , उसे डांस करना बहुत पसंद था , एक्चुली पसंद ही नहीं डांस उसका पैशन था , वो पढ़ाई के अतिरिक्त डांसिंग में अपना करियर बनाना चाहती थी , लेकिन फॅमिली बैकग्राउंड रूरल एरिया से होने के कारन उसे पीछे से प्रोत्साहन और इकोनोमिकली सप्पोर्ट नहीं मिल पा रहा था , इसलिए अनन्या को खास इसी तरह के मौको की तलाश थी , जिसके माध्यम से अपना टैलेंट सबके सामने ला सके , उसे उम्मीद थी की इस साल के एनुअल फंक्शन में उसे ऐसा कुछ करने का मौका जरूर मिल जायेगा |


प्रेपरेशन हॉल में अलग अलग जगहों पर अलग अलग स्टूडेंट्स के झुण्ड लगे थे, सभी अपने अपने मेंटोर के साथ तैयारी कर रहे थे |


कोरिओग्राफर विक्रम सिंह  (थोड़ी तेज आवाज में कहा ) - श्रुति , प्लीज अब तुम बैठ जाओ , ये स्टेप्स तुम नहीं कर पा रही हो , थोड़ा रैस्ट करो , फिर से ट्राई करना |

श्रुति - (अनमने ढंग से ) ओके सर , आई ऍम लीविंग | Read Full Story


हिंदी कहानी - आज दोपहर १२ बजे

अब दीपक हद से ज्यादा डरा हुआ था | अपनी साँस लेने की आवाज भी उसे डरा रही थी | दिल की धड़कन जरुरत से ज्यादा तेज चल रही थी | उसने अपनी पुरानी साईकिल उठायी और अपना स्कूल का बेग ले के

स्कूल की और चल पड़ा | रस्ते भर उसके दिमाग में बीती हुई बाते ही चल रही थी | स्कूल पहुंच के अपनी क्लास में पंहुचा तो साथ बाले लड़के शरारते कर रहे थे | दीपक रोज से कुछ अलग तरह का व्यबहार कर रहा था | उसके चेहरे अब भी डर की लकीरे साफ साफ दिख रही थी | दीपक शांत बैठा रहा | चलो चलो भागो मजा आ गया जैसी अबाजे दीपक के कान में गई तो तो उसने मुड़ के देखा सारे बच्चे स्कूल बैग उठा के भाग रहे है | पता करने पे पता चला के किसी अकस्मात घटना होजाने की बजह से स्कूल की छुट्टी कर दी गयी है | अब दीपक ने भी अपना बैग उठाया और अनमना सा चल देता है |

आज जल्दी छुट्टी हो गयी है तो घर ही चलता हूँ | और दीपक घर की और साईकिल मोड़ देता है | गांव की और जाने वाली सड़क बहुत ही बेहाल होने के कारन साईकिल बहुत ही धीमे चलनी पड़ रही थी | लगभग आधा घंटा साईकिल चलने के बाद दीपक को प्यास महसूस हुई लेकिन आस पास कुछ नहीं था |

धूप बहुत ही तेज थी जिसके कारन व्याकुलता बढ़ती जा रही थी | सामने एक पेड़ था सोचा चलो थोड़ा ठंडी छाया में खड़ा होता हूँ | उसके बाद चलूँगा | थोड़ा सा वक्त बीता ही था के दीपक ने देखा एक औरत बगल में थैला लटकाये और एक थैला हाथ में पकड़े हुए आ रही है | पास आने पे उसने देखा ये तो मुन्नी चची है | जो बरसो पहले गायब हो गयी थी | छुटकन चाचा कितने परेशान रहे थे इनको ढूंढने के लिए | वो तो रोते रोते पागल से हो गए थे | और बाद में न जाने कहा चले गए थे | आज तक न पता चला जिन्दा है भी या नहीं | अब ये कहा से आ रही है | 

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