Benefits of SURYA NAMASKAR YOGA | सूर्यनमस्कार - सन सेल्यूटेशन (Sun Salutation) | सूर्य नमस्कार कैसे करें? (How To Do Surya Namaskar In Correct Posture)

 

Benefits of "SURYA NAMASKAR YOGA"


सूर्यनमस्कार - सन सेल्यूटेशन (Sun Salutation)

सूर्य नमस्कार - सूर्य नमस्कार एक सम्पूर्ण योगा के रूप में भी जाना जाता है , इसे सर्वांग व्यायाम भी कहा जाता है , अगर इस योगासन को आप नियमित रूप से रोज सुबह सूर्योदय के समय करते है तो आपको अन्य योगासन करने की कोई आवश्यकता नहीं रह जाती | सदियों से ब्रहम्माण्ड में सूर्य को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता रहा है , इसलिए पुरातन काल से ही हमारे ऋषि मुनि सूर्य की पूजा करते चले आ रहे है सूर्य नमस्कार का शाब्दिक अर्थ सूर्य को अर्पण या नमस्कार करना होता है |  सूर्यनमस्कार आसन को नियमित रूप से करने से शारीरिक अकार और मन को शांति मिलती है |


सूर्यनमस्कार योगासन 12 शक्तिशाली योगासनों से मिल कर एक सम्पूर्ण आसान बनता है | जो एक बहुत ही उच्च कोटि का व्यायाम है , जिससे शारीरिक और मानसिक स्वस्थता मिलती है | इसलिए सूर्यनमस्कार योगासन को सर्श्रेष्ठ योगासन माना जाता है |


सूर्य नमस्कार कैसे करें? (How To Do Surya Namaskar In Correct Posture)

सूर्य नमस्कार करने का सही और फायदेमंद तरीका हम आपको स्टेप बाय स्टेप बताने जा रहे है , यह 12  स्टेप्स में पूरा किया जाता है , जो की निम्नलिखित है |

सूर्य नमस्कार (Sun Salutation) करने का सही तरीका - स्टेप बाय स्टेप ( Step By Step)

  • प्रणामासन (Pranamasana - The Prayer Pose)
  • हस्तउत्तनासन (Hasta Uttanasana - Raised Arms Pose) 
  • पादहस्तासन (Padahastasana - Standing Forward Bend)
  • अश्व संचालनासन (Ashwa Sanchalanasana - Equestrian Pose)
  • दंडासन (Dandasana - Staff Pose )
  • अष्टांग नमस्कार (Ashtanga Namaskara - Eight Limbed pose or Caterpillar pose)
  • भुजंगासन (Bhujangasana - Cobra Pose)
  • अधोमुख शवासन (Adho Mukha Svanasana - Downward-facing Dog Pose)
  • अश्व संचालनासन (Ashwa Sanchalanasana - Equestrian Pose)
  • पादहस्तासन (Padahastasana - Hand Under Foot Pose)
  • हस्तउत्तनासन (Hasta Uttanasana - Raised Arms Pose)
  • प्रणामासन (Pranamasana - The Prayer Pose)

Surya Namaskar Correct Posture (Image By Google)




1- प्रणामासन (Pranamasana - The Prayer Pose)
सबसे पहले सीधे सूर्य की और मुख करके खड़े हो साथ ही ध्यान रहे , कमर सीधी रखे , और दोनों पैरो को मिलाये , अब हाथ को सीने के पास लेजाये फिर दोनों हथेलियों को मिला कर प्रणाम की अबस्था में खड़े हो जाये |

2 - हस्तउत्तनासन (Hasta Uttanasana - Raised Arms Pose)  
पहले की तरह ही सीधी अबस्था में खड़े हो कर अपने दोनों हाथो को सर की तरफ ले जाये और प्रणाम की मुद्रा बनाये साथ ही कमर को पीछे की और झुकाये , धयान रहे पीछे गिर न जाये |

3 - पादहस्तासन (Padahastasana - Standing Forward Bend)
अब धीरे धीरे कमर को सीधा करे , धीरे धीरे साँस छोड़ते हुए कमर को आगे की और झुकाये , और अपने हाथो की उंगलियों से पैर की उंगलियों को छुए , साथ ही इस दौरान आपका सर घुटनो के आस पास या घुटनो को छूना चाहिए |

4 - अश्व संचालनासन (Ashwa Sanchalanasana - Equestrian Pose)
धीरे-धीरे सांस लें और सीधा पैर पीछे की ओर फैलाएं। सीधे पैर का घुटना जमीन से मिलना चाहिए। अब दूसरे पैर को घुटने से मोड़ें और हथेलियों को जमीन पर सीधा रखें। सिर को आसमान की ओर रखें।

5 - दंडासन (Dandasana - Staff Pose )
अब सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों और पैरों को सीधी लाइन में रखें और पुश-अप की पोजीशन में आ जाएं,  और कुछ देर रुके |

6 अष्टांग नमस्कार (Ashtanga Namaskara - Eight Limbed pose or Caterpillar pose)
अब सांस लेते हुए अपनी हथेलियों, सीने, घुटनों और पैरों को जमीन से मिलाएं। इस अवस्था में रहें और सांस को रोकें।

7 - भुजंगासन (Bhujangasana - Cobra Pose)
 इस स्थिति में धीरे-धीरे श्वास को भरते हुए छाती को आगे की ओर खींचते हुए हाथों को सीधे कर दें। गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं। घुटने पृथ्वी का स्पर्श करते हुए तथा पैरों के पंजे खड़े रहें। मूलाधार को खींचकर वहीं ध्यान को टिका दें।

8-अधोमुख शवासन (Adho Mukha Svanasana - Downward-facing Dog Pose)
श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकलते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। दोनों पैरों की एड़ियां आपस में  मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप में लगाएं। ध्यान 'सहस्रार चक्र' पर केन्द्रित करने का अभ्यास करें।

9- अश्व संचालनासन (Ashwa Sanchalanasana - Equestrian Pose)
इसी अबस्था में साँस को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। छाती को खींचकर आगे की ओर खींचे। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांगे तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस स्थिति में कुछ समय रुकें। ध्यान को 'स्वाधिष्ठान' अथवा 'विशुद्धि चक्र' पर ले जाएँ।
 
10 -पादहस्तासन (Padahastasana - Hand Under Foot Pose)
 तीसरी स्थिति में श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकाएं। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी का स्पर्श करें। घुटने सीधे रहें। माथा घुटनों का स्पर्श करता हुआ ध्यान नाभि के पीछे 'मणिपूरक चक्र' पर केन्द्रित करते हुए कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें। कमर एवं रीढ़ के दोष वाले साधक न करें।

11-हस्तउत्तनासन (Hasta Uttanasana - Raised Arms Pose)
पहली अवस्था में ही खड़े होकर अपने हाथों को सिर के ऊपर उठाकर सीधा रखें। अब हाथों को प्रणाम की अवस्था में ही पीछे की ओर ले जाएं और कमर को पीछे की तरफ झुकाएं। इस दौरान आप आधे चांद का आकार बनाएंगी। इस आसन को अर्धचंद्रासन भी कहा जाता है।

12 - प्रणामासन (Pranamasana - The Prayer Pose)
सूरज की तरफ चेहरा करके सीधे खड़े हों और दोनों को पैरों को मिलाएं, कमर सीधी रखें। अब हाथों को सीने के पास लाएं और दोनों हथेलियों को मिलाकर प्रणाम की अवस्था बनाएं।





विशेष -
12 सूर्य नमस्कार और दूसरे योगासनों  को करने बाद योग निद्रा में पूर्ण विश्राम अवश्य करें। फिर आप  एक सुखद और स्वस्थ आनंद की अनुभूति महसूस करेंगे , और साथ ही पाएंगे कि यह आपके चुस्त दुरुस्त, प्रसन्न और शांत रहने का मंत्र बन गया है; एक मंत्र जिस का प्रभाव दिन भर आप के साथ रहेगा I सूर्य नमस्कार — एक सम्पूर्ण व्यायाम।




सूर्य नमस्कार के फायदे? (Health Benefits of Surya Namaskar) (Sun Salutation)

  • वजन कम करने में मदद करता है।
  • पाचन और भूख में सुधार करता है।
  • शरीर को लचीला बनाता है।
  • कब्ज की समस्या को ठीक करने में कारगर है।
  • शारीरिक और मानसिक मजबूती बढ़ाता है।
  • बॉडी पोस्चर को बेहतर करता है और बैलेंस बनाने में मदद करता है।
  • मसल्स को टोन करता है3 और हड्डियों को मजबूत करता है।
  • बाजू, कंधों, कमर, पैर, क्वैड्स, काफ़्स और हिप्स की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
  • शरीर में खून का प्रवाह तेज होता है जिससे ब्लड प्रेशर की बीमारी में आराम मिलता है


सूर्य नमस्कार करते समय क्या सावधानियां  बरतनी चाहिए ?

  • सूर्य नमस्कार सुबह सूर्य निकलने से पहले शुद्ध ताजा हवा में करना चाहिए |
  • सूर्य नमस्कार सुबह खली पेट ही करना चाहिए |
  • अत्यधिक कमजोरी होने पर सूर्य नमस्कार आसन न करे |
  • शुरुआत में सूर्य नमस्कार धीरे धीरे करे , फिर अभ्यास हो जाने पर सुचारु रूप से कर सकते है |





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